Book महामृत्युंजय जाप
महामृत्युंजय जाप
महामृत्युंजय जाप परिचय: महामृत्युंजय जाप भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत शक्तिशाली वैदिक मंत्र का जप है, जिसे मृत्यु को जीतने वाला मंत्र भी कहा जाता है। यह मंत्र ऋषि मार्कण्डेय द्वारा बताया गया था और यजुर्वेद में वर्णित है। इसका नियमित जप जीवन में शांति, आरोग्य और दीर्घायु प्रदान करता है। मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥ अर्थ: हम उस त्रिनेत्रधारी (भगवान शिव) की उपासना करते हैं, जो सुगंधित हैं और पोषण करने वाले हैं। जैसे ककड़ी पककर बेल से स्वतः अलग हो जाती है, वैसे ही हम मृत्यु के बंधन से मुक्त हो जाएं, लेकिन अमरत्व को प्राप्त करें। महत्व और लाभ: आरोग्य की प्राप्ति: यह जाप रोग, भय और मानसिक तनाव को दूर करता है। मृत्यु भय से रक्षा: अकाल मृत्यु, दुर्घटनाओं, ऑपरेशन या गंभीर बीमारियों में जीवन की रक्षा करता है। शांति और सकारात्मक ऊर्जा: यह मानसिक स्थिरता, शांति और आत्मबल को बढ़ाता है। ग्रह दोष निवारण: कुंडली के दोष, पितृदोष या कालसर्प योग में यह अत्यंत प्रभावी माना गया है। आध्यात्मिक जागृति: आत्मा को जागरूक करने और मोक्ष की ओर अग्रसर करने वाला जाप। जाप विधि: संकल्प: जाप से पहले अपने उद्देश्य को स्पष्ट रूप से संकल्प में लें। शुद्धता: स्वच्छ स्थान, वस्त्र और मन से जाप करें। रुद्राक्ष माला: 108 बार या उसके गुणक में जाप करें। गुरु या पंडित से करवाना: यदि स्वयं न कर सकें तो अनुभवी ब्राह्मण द्वारा अनुष्ठान कराया जा सकता है। अवधि: जाप 1,25,000 बार (एक महापुरुषार्थ) करवाना अत्यंत फलदायक होता है। हवन: जाप के पश्चात महामृत्युंजय हवन करना शुभ माना जाता है। कब करें: किसी रोग, संकट, कोर्ट केस, जीवन संकट या ग्रह दोष के समय रुद्राभिषेक, रक्षाबंधन, श्रावण मास, महाशिवरात्रि, जन्मदिन या पुण्य तिथियों पर
- Duration: 6 Hours
- Price: ₹551.00
- Best Time: Flexible